I wrote this poem some time 5 years ago. At that time Kalam sir was the president and he was inspiring Indian youth. I revisited this poem while writing a new one this year. Thought to put it on the blog. If you wish to listen it you can visit
http://www.esnips.com/doc/7d50bffb-f43a-48cf-a2c5-839ab8f7eb46/My-dream
recorded on laptop so unable to provide true flavor of ‘veer rus’ because of noise problem.
मेरी इच्छा मेरा सपना, विश्वविजयी हो भारत अपना |
भारत की थी स्वर्णिम पहचान, अब विश्व जिससे अनजान ||
कारण इसके क्या-क्या खोजूं , हर कारण में खुद को पाता हूँ |
दोषी दूजे को बोलूँ , पहले खुद को दोषी पाता हूँ ||
जाग उठा ईमान है मेरा, जाग उठी है मेरी आशा |
विश्वविजयी भारत की, करने को पूरी अभिलाषा ||
उठो जागो भारत के युवा, भारत का लोहा मनवाना है |
कदम ताल से कदम मिलाओ, आज विश्व को थर्राना है ||
जगा न गर स्वाभिमान तुम्हारा, देश गुलाम हो जायेगा |
इतने टुकड़े होंगे भारत के, लज्जित रशिया भी इतराएगा ||
देश के मुखिया का है कहना, युवा है भारत का गहना |
सच ये कर दिखलाना है, हर युवा को आगे आना है ||
मैं भारत का युवा हूँ, पहला कदम बढाऊंगा |
काँटों की राह पे चल, देश को उन्नत बनाऊंगा ||
मेरे हैं विचार अलग, अलग है मेरी परिभाषा |
भावों का उद्वेग अलग है, अलग है मेरी अभिलाषा ||
बात करुँ ना मंडल की, खून से सने कमंडल की |
बिश्व विजेता बनने को, बात करुँ मैं भूमंडल की ||
विश्व का होना अगुआ हमको, पिछलग्गू क्यों बनते हैं |
बेगैरत देशों के हाथों, कठपुतली क्यों बनते हैं ||
सिद्धांतों की बातें छोड़, हकीकत को अपनाना होगा |
विश्व से बात मनवाने को, हर युवा को आगे आना होगा ||
साँपों से घिरे भारत को, शक्तिशाली बनाना होगा |
आतंकवाद का फन कुचल, कदम आगे बढाना होगा ||
टूटे सोये लोगों के साथ, राह नहीं अपनी आसान |
गरीबी स्वार्थ न कोई आत्मसम्मान, बन चुका देश की पहचान ||
पवन सुत के इस देश में, हर कोई खुद से अनजान |
हार गए हैं , टूट गए हैं, बिखर चुके हैं उनके अरमान ||
शिकायतों का पुलिंदा सबका, न किसी के पास समाधान |
असंतोष की इस ज्वाला में, भारत होता है बदनाम ||
निराशा के घुप्प अंधियारे में, आशा का दिया जलाना है |
अथाह धैर्य की परीक्षा में, हर युवा को आगे आना है ||
पचास करोड़ को मिलकर साथ, राष्ट्रवादी आंधी को लाना है |
नए विचार का कर सूत्रपात, समस्या को दूर भगाना है ||
उदय नयी क्रान्ति का कर, देश का विश्वास जगाना है |
हर किसी को अहसास हो , भारत को आगे लाना है ||
भारत को विश्वविजयी बनाना है |
जब ये सपना हकीकत बन जायेगा, विश्व नतमस्तक हो जाएगा |
भारत विश्वविजयी बन जाएगा, मेरा सपना सच हो जाएगा ||
मेरा सपना सच हो जाएगा ||
जय हिंद